पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहां से आया

Hello Friends, पृथ्वी अपने जन्म के समय एक आग का गोला थी जो बीतते समय के साथ ठंडी हुई। ऐसे में क्या आपको पता है कि पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहां से आया। शायद आपने कभी इस बात पर ध्यान नहीं दिया होगा लेकिन अब आपको इसके बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है क्योंकिि Prithvi Par Pani Kaha Se Aaya  इसके बारे में आज मै आपको पूरे विस्तार से बताने जा रहा हूं।

जल ही जीवन है ये वाक्य आपने बचपन से सुना होगा जो धरती पर मौजूद हर एक प्राणी के लिए बहुत जरूरी है। नदियों, तालाबों, झरनों और झिलो में मौजूद पानी मनुष्य समेत विभिन्न जीव जंतुओं के प्यास बुझाने और जिंदा रखने में मदद करती है। वहीं आसमान से बरसने वाला पानी खेतों मे फसलों, जंगलों और पेड़ पौधों के पनपने के लिए कितना जरूरी होता है ये आप सब तो जानते ही होंगे।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहा से और कैसे आया होगा, उसका विस्तार कैसे हुआ होगा और वो धरती पर विभिन्न रूपों में कैसे बंटा होगा यानी की सागर, महासागर, नदियां कैसे बने होंगे? अगर आप इस तरह के सवालों के जवाब चाहते हैं तो आप इस पोस्ट को पूरा अच्छे से पढ़ें। दोस्तों वैज्ञानिकों ने इन सब सवालों से जुड़े कुछ थियोरी रखी हैं तो आइए जानते हैं कि वैज्ञानिक दृष्टि से पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहा से और कब आया होगा।

पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहां से आया

पहली थियोरी

वैज्ञानिकों की पहली थियोरी कहती है कि धरती पर पानी आने के लिए उल्का पिंड व क्षुद्रग्रह जिम्मेदार हैं जो समय समय पर पृथ्वी की सतह से टकराए और अपने साथ पानी की मात्रा लेकर आए। आपको बता दें कि अंतरिक्ष में लाखो करोड़ों क्षुद्रग्रह और उल्का पिंड घूमते रहते हैं। ये उल्का पिंड जैसे ही पृथ्वी के करीब आते हैं पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल अपने तरफ खीच लेता है।

और जब ये उल्का पिंड पृथ्वी के सतह से टकराते हैं तो उनमें मौजूद खनिज तत्व बिखर जाते हैं। विभिन्न वैज्ञानिक शोधों से इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि क्षुद्रग्रहों और उल्का पिंडो में पानी की मौजूदगी होती है जो अंतरिक्ष से किसी भी ग्रह पर खनिज तत्व पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जब पृथ्वी आज का गोला थी तब उस समय उसके पास आने वाली हर चीज जल कर राख हो जाती थी।

लेकिन जैसे जैसे पृथ्वी ठंडी होने लगी और उसके तापमान में गिरावट आने लगी वैसे वैसे पृथ्वी के आस पास घूमने वाले क्षुद्रग्रह और उल्का पिंड करीब आने लगे। यही उल्का पिंड और क्षुद्रग्रह पृथ्वी से समय समय पर टकराते रहे और पृथ्वी पर पृथ्वी पर पानी की मात्रा बढ़ाने में भूमिका निभाते रहे।

दूसरी थियोरी

ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के मिश्रण से तैयार होने वाले जल को लेकर वैज्ञानिकों ने दूसरी थियोरी भी तैयार किया है जिसके तहत ये माना जाता है कि पृथ्वी पर पानी कहीं बाहर से नहीं आया बल्कि ये हमेशा से ही धरती पर मौजूद था। इस थियोरी के अनुसार वैज्ञानिकों का यह मानना है कि जब विभिन्न चट्टानों और धूल के कणों से मिलने से पृथ्वी का निर्माण हुआ था उसी दौरान उन धूलकणों पर पहले से पानी मौजूद था।

ऐसे में जब इन धूलकण के मिलने से पृथ्वी का निर्माण हुआ था तो उनमें मौजूद पानी की मात्रा बहुत ज्यादा थी। हालांकि उस समय ये पानी शायद तरल रूप में नहीं रहा होगा वर्ना अपने निर्माण के बाद पृथ्वी आज के गोले में नहीं बदल जाती। पृथ्वी पर पानी की मौजूदगी को लेकर की गई एक शोध ये बताती है कि पृथ्वी की सतह से 700 किलोमीटर नीचे एक विशालकाय समुंद्र है जिसमे मौजूद पानी का भर पृथ्वी के कुल भर का 1.5% हिस्सा है।

इस समुंद्र में पानी की मात्रा उतनी ही है जितना दुनिया भर में मौजूद समुंद्र में पानी की मात्रा है। पृथ्वी के अंदर मौजूद इस समुंद्र से ये बात साबित होती है कि पृथ्वी पर पानी सिर्फ क्षुद्रग्रहों और उल्का पिंडो के जरिए ही नहीं आया है बल्कि ये पृथ्वी के निर्माण से ही मौजूद था।

महासागरों के निर्माण में चंद्रमा कि भूमिका

दोस्तों पृथ्वी पर इतना सारा पानी होने के पीछे चंद्रमा का भी अहम भूमिका है क्योंकि चंद्रमा के निर्माण से ही पृथ्वी पर मौसम चक्र कि शुरुआत हुई थी। ऐसे में जब पृथ्वी का वायुमंडल बना और मौसम चक्र शुरू हुआ तो क्षुद्रग्रहों के द्वारा आया पानी भाप बन कर उड़ने लगा और आसमान में बादलों का निर्माण हुआ।

यही बदल बहुत दिनों तक बरसते रहे जिसकी वजह से पृथ्वी पर पानी की मात्रा में बढ़ोतरी होने लगी। उल्का पिंडो से पृथ्वी पर पानी की एक सीमित मात्रा ही प्राप्त हुई होगी जिसे चंद्रमा के निर्माण ने कई गुना तक बढ़ा दिया। वहीं जो पृथ्वी के अंदर पानी मौजूद था वो समुंद्र का शक्ल लेने लगा। पृथ्वी पर मौसम चक्र से नदियों, तालाबों, झीलों और झरनों का निर्माण हुआ था जो बढ़ते बढ़ते समुंद्र और महासागरों में बदल गए।

दोस्तों हाल ही में एक उल्का पिंड पर शोध किया गया था जिसमे इस बात को खुलासा किया गया था कि पृथ्वी पर पानी शुरुआती दौर से ही मौजूद रहा होगा। साइंस जनरल में प्रकाशित इस शोध में बताया गया कि पृथ्वी की पुरातन काल की चट्टानों में पानी की इतनी ज्यादा मात्रा पाई गई है कि उससे आज के आकार में तीन गुना महासागरों को भरा जा सकता था। इस शोध से ये भी पता चलता है कि क्षुद्रग्रहों और उल्का पिंडो से केवल 5% ही पानी आया होगा और बाकी का 95% पानी पृथ्वी की खुद की सरंचना से हुआ है।

Conclusion

दोस्तों हमने आपको वैज्ञानिक शोधों के आधार पर ये बता दिया है कि पृथ्वी पर पानी की मौजूदगी के पीछे क्या कारण हो सकते हैं। लेकिन हो सकता है कि आने वाले समय में इस विषय पर कोई नई थियोरी सामने आ जाए। उम्मीद करते हैं कि आपको ये पता चल गया होगा कि Prithvi Par Pani Kaha Se Aaya और आपको हमारी ये पोस्ट पृथ्वी पर इतना सारा पानी कहां से आया पसंद आयी होगी। इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें और अगर आपके मन में कोई सवाल हो तो आप हमसे कॉमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

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